आध्यात्मिक अनुष्ठान

श्री यंत्र — शुक्रवार सक्रियता विधि

शुक्र ग्रह (Venus) और श्री यंत्र दोनों का संबंध माँ लक्ष्मी से है। शुक्रवार को शुक्र की ऊर्जा सर्वाधिक होती है — इस दिन श्री यंत्र को ऊर्जा देने से यंत्र की शक्ति कई गुना बढ़ती है।

यंत्र के प्रकार और उपयोग

चाँदी का श्री यंत्र

धन और समृद्धि के लिए सर्वोत्तम

तांबे का श्री यंत्र

घर की सुरक्षा और समृद्धि

स्फटिक श्री यंत्र

नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा और शांति

सोने का श्री यंत्र

व्यापार में अत्यधिक वृद्धि

श्री यंत्र सक्रियता विधि

1

शुद्धि

श्री यंत्र को गंगाजल से धोएं। सफेद कपड़े से पोंछकर सुखाएं।

2

वेदी स्थापना

पूर्व दिशा में लाल कपड़े पर श्री यंत्र रखें। सामने घी का दीपक जलाएं।

3

पंचामृत अभिषेक

दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से क्रमशः अभिषेक करें। प्रत्येक के साथ "ॐ श्रीं" बोलें।

4

जल अभिषेक

गुलाब जल या गंगाजल से अंतिम अभिषेक करें।

5

बीज मंत्र जाप

"ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" — 108 बार।

6

कुमकुम और अक्षत

यंत्र के केंद्रीय बिन्दु (बिन्दु) पर कुमकुम और अक्षत चढ़ाएं।

7

स्थापना

पूजा के बाद यंत्र को पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में स्थायी रूप से स्थापित करें।

करें

  • शुक्रवार को प्रतिसप्ताह दीपक जलाएं
  • यंत्र को सफेद कपड़े में लपेटकर रखें
  • प्रातः दर्शन करें और प्रणाम करें
  • महीने में एक बार गुलाब जल से पोंछें

न करें

  • यंत्र को जमीन पर न रखें
  • अपवित्र अवस्था में स्पर्श न करें
  • यंत्र को किसी और को न दें
  • टूटे या खंडित यंत्र की पूजा न करें
शुक्रवार श्री यंत्र ऊर्जा सक्रियता — विधि और मंत्र | वेदकोश | VedKosh