26 अप्रैल 2026रविवार द्वादशी
🪓 परशुराम द्वादशी 2026 — अक्षय तृतीया चक्र की पूर्णाहुति
26 अप्रैल 2026 रविवार — परशुराम जयंती का 12वां दिन। वैदिक अनुशासन और सौर पराक्रम का संयोग। इस दिन की पूजा से नई शुरुआतें मजबूत होती हैं।
🪓 परशुराम — योद्धा-ब्राह्मण, 6ठे विष्णु अवतार
परशुराम विष्णु के छठे अवतार हैं जो अभी भी जीवित हैं (चिरंजीवी)। भृगु ऋषि के पुत्र परशुराम ने पृथ्वी को 21 बार क्षत्रियों से मुक्त किया। वे "वेद-शस्त्र" के प्रतीक हैं — ज्ञान और पराक्रम का संयोग। परशुराम जयंती अक्षय तृतीया को ही होती है — इसलिए द्वादशी (12वां दिन) उस ऊर्जा का समापन और स्थिरीकरण है।
📅 यह रविवार क्यों विशेष है
1
द्वादशी = 12वां दिन
अक्षय तृतीया से गिनें तो 12वां दिन — परशुराम ऊर्जा का समापन दिवस
2
रविवार + द्वादशी
सूर्य (रविवार) + परशुराम (सूर्यवंशी गुरु) — दोहरी योद्धा-ब्राह्मण शक्ति
3
नई शुरुआत स्थापित करें
26 अप्रैल तक जो शुरू किया वह इस दिन "मजबूत आधार" पर स्थापित हो जाता है
🕉️ परशुराम गायत्री मंत्र
ॐ जामदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि। तन्नो परशुरामः प्रचोदयात् ॥
🌿 पूजा सामग्री
परशु (कुल्हाड़ी) का चित्र
पूजा में परशुराम का चित्र या परशु का प्रतीक
लाल फूल
परशुराम को लाल फूल विशेष प्रिय हैं
तांबे का पात्र
सूर्य अर्घ्य के लिए
गेहूं
परशुराम को गेहूं का भोग और दान
घी का दीपक
पूर्व या उत्तर दिशा में
✅ पूजा विधि — 5 चरण
☑ परशुराम द्वादशी चेकलिस्ट
0/5- प्रातः स्नान के बाद पूर्व दिशा में पूजा स्थान स्थापित करेंपरशुराम का चित्र और सूर्य का चित्र साथ रखें
- लाल फूल, गेहूं, घी का दीपक — पूजा सामग्री सजाएं
- परशुराम गायत्री मंत्र 108 बार जाप करें
- तांबे के पात्र से सूर्य को अर्घ्य दें — ॐ घृणि सूर्याय नमः
- गेहूं का दान करें — किसी ब्राह्मण या मंदिर मेंइससे अक्षय तृतीया चक्र की पूर्णाहुति होती है