ब्राह्माण्ड पुराण — ललितोपाख्यान

ललिता सहस्रनाम
1000 नाम — अर्थ और श्रीविद्या-मार्ग

श्री माता श्री महाराज्ञी श्रीमत्सिंहासनेश्वरी

Shri Mata Shri Maharajni Shrimat-Simhasaneshvari

"श्रीमाता, श्री-महारानी, सिंहासन की देवी..." — प्रथम तीन नाम

1000

नाम

ब्राह्माण्ड पुराण

स्रोत

हयग्रीव → अगस्त्य

परम्परा

15

पञ्चदशी-अक्षर

ललिता त्रिपुरसुन्दरी — कौन हैं?

ललिता त्रिपुरसुन्दरी (जिन्हें राजराजेश्वरी, श्री देवी, या श्री लक्ष्मी भी कहा जाता है) शक्ति की दस महाविद्याओं में सर्वोच्च हैं। "त्रिपुरसुन्दरी" का अर्थ है "तीनों लोकों में सबसे सुन्दर।" श्रीविद्या परम्परा में वे परब्रह्म (परम सत्ता) हैं — जगत केवल उनकी लीला है। उनकी उपासना का केन्द्र श्रीयंत्र है और मूल मंत्र पञ्चदशी है।

स्रोत

ब्राह्माण्ड पुराण (ललितोपाख्यान)

परम्परा

श्रीविद्या (शाक्त-तंत्र)

यंत्र

श्रीयंत्र (नव-त्रिकोण)

पाठ-विशेष

नवरात्र, शुक्रवार, पूर्णिमा

1000 नामों के समूह — विषयानुसार

सौन्दर्य · शक्ति · करुणा · विश्वरूप — चार मूल पहलू

सौन्दर्य-नाम

नाम 1–111

पहले सौ नाम ललिता को सर्वोच्च रानी (श्री महाराज्ञी) के रूप में सिंहासन पर स्थापित करते हैं। वे शुद्ध चेतना की अग्नि से प्रकट हुईं — गर्भ से नहीं, चिदग्निकुण्ड से।

श्री माताश्री महाराज्ञीश्रीमत्सिंहासनेश्वरीचिदग्निकुण्डसम्भूतादेवकार्यसमुद्यता...

शक्ति-नाम

नाम 112–222

शक्ति-नाम ललिता की भयावह शक्ति का वर्णन करते हैं — पाश, अंकुश, इक्षुधनुष, पुष्प-बाण और भण्डासुर-वध। वे एक साथ सुन्दर और भयावह — दैवीय नारी-शक्ति का पूर्ण रूप।

चम्पेयपुष्पभासुरारत्नघटिस्थलमणिकुंकुमलेपनरक्ताङ्गीचम्पकाशोकपुन्नागसौगन्धिकलसत्कचा...

करुणा-नाम

नाम 223–333

ललिता वैदिक अनुष्ठान के गहरे पहलुओं में हैं — स्वाहा (देवताओं को आहुति), स्वधा (पितरों को हवि)। वे ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र — सभी को सुलभ। करुणा-नाम दर्शाते हैं: भयावह देवी ही प्रत्येक प्रार्थना सुनने वाली माता है।

सुमेरुमध्यशृंगस्थाश्रीवारिमित्रलक्षणास्वाहास्वधाअमात्या...

विश्वरूप-नाम

नाम 334–444

विश्वगर्भा — सभी लोकों की धारक। स्वर्णनाभि — स्वर्णिम नाभि। वरदा — वरदायिनी। वागधीश्वरी — वाक्-देवी। ध्यानगम्या — ध्यान से प्राप्य। ये नाम व्यक्तिगत देवी को निर्गुण ब्रह्म से जोड़ते हैं।

विश्वगर्भास्वर्णनाभिवरदावागधीश्वरीध्यानगम्या...

श्रीविद्या — चार मूल तत्त्व

मंत्र · यंत्र · तंत्र · पुराण-सन्दर्भ

श्रीविद्या — पवित्र ज्ञान

श्रीविद्या वह तान्त्रिक परम्परा है जो ललिता त्रिपुरसुन्दरी को परम सत्ता के रूप में पूजती है। ललिता सहस्रनाम इस परम्परा का प्राथमिक पाठ है। ब्रह्माण्ड उनका शरीर, चेतना उनकी प्रकृति, मोक्ष उनसे मिलन।

पञ्चदशी मंत्र

15-अक्षर मूल मंत्र: क-ए-ई-ल-ह्रीं (वाग्भव-कूट) / ह-स-क-ह-ल-ह्रीं (मध्य-कूट) / स-क-ल-ह्रीं (शक्ति-कूट)। तीन कूट: वाक्/ज्ञान, चेतना, शक्ति। इतना शक्तिशाली कि परम्परागत रूप से गुरु-शिष्य क्रम में ही प्रदान किया जाता है।

ब्राह्माण्ड पुराण — मूल स्रोत

ललिता सहस्रनाम ब्राह्माण्ड पुराण में ललितोपाख्यान में है। हयग्रीव (विष्णु का अश्वमुख रूप — वाक् और ज्ञान के स्वामी) ने अगस्त्य मुनि को गोदावरी तट पर ये नाम सुनाए। इस कथा-ढाँचे का महत्त्व: स्वयं विष्णु ललिता को परम सत्ता मानते हैं।

श्रीयंत्र — ज्यामितीय शरीर

श्रीयंत्र (9 त्रिकोण — 5 नीचे, 4 ऊपर) ललिता त्रिपुरसुन्दरी का ज्यामितीय शरीर है। 43 त्रिकोण उनके नाम-समूहों के अनुरूप। सहस्रनाम-पाठ के साथ श्रीयंत्र-उपासना सर्वोच्च साधना। केन्द्र-बिन्दु = ललिता का निराकार स्वरूप।

पञ्चदशी मंत्र — 15 बीजाक्षर

वाग्भव-कूट (ज्ञान)

Ka-E-I-La-Hreem

क-ए-ई-ल-ह्रीं

मध्य-कूट (चेतना)

Ha-Sa-Ka-Ha-La-Hreem

ह-स-क-ह-ल-ह्रीं

शक्ति-कूट (शक्ति)

Sa-Ka-La-Hreem

स-क-ल-ह्रीं

इस मंत्र की तीन कड़ियाँ मिलकर पञ्चदशी बनाती हैं। ब्रह्मज्ञान + चेतना + शक्ति = ललिता-तत्त्व।

🕉️ नवरात्र-पाठ और श्रीयंत्र-पूजा

नवरात्र-पाठ

प्रतिदिन एक पाठ (1000 नाम) — 9 दिन में 9 पाठ सर्वोत्तम

श्रीयंत्र-पूजा

कुमकुम, पुष्प, दीप और श्रीयंत्र के सामने पाठ — सर्वोच्च साधना

एकल-पाठ

शुक्रवार या पूर्णिमा को एक पाठ — लक्ष्मी-कृपा और शांति के लिए

दीक्षा की आवश्यकता?

सामान्य पाठ के लिए नहीं। पञ्चदशी-उपासना के लिए गुरु-दीक्षा अनुशंसित

देवी महात्म्यम्, विष्णु सहस्रनाम और अन्य स्तोत्र

देवी महात्म्यम् →विष्णु सहस्रनाम →सभी आरती →

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