ओम जय जगदीश हरे
ओम जय जगदीश हरे भारत की सबसे लोकप्रिय आरती है जो भगवान विष्णु को समर्पित है और हर पूजा के अंत में गाई जाती है।
प्रत्येक हिंदू पूजा के अंत में गाया जाता है, विशेषकर संध्या पूजा में, सोमवार से रविवार तक
बीसवीं सदी में स्वामी शिवानंद द्वारा रचित; किसी भी पंथ या क्षेत्र की सीमाओं से परे भारत की राष्ट्रीय घरेलू आरती बन गई।
महत्व एवं विशेषता
ओम जय जगदीश हरे भारत की सर्वाधिक गाई जाने वाली आरती है। यह भगवान विष्णु को समर्पित है और लगभग हर हिंदू परिवार में प्रतिदिन संध्या पूजा के समय गाई जाती है। इस आरती में ईश्वर की सर्वव्यापकता, दयालुता और भक्त-वत्सलता का गुणगान किया गया है।
Hindi Lyrics (मूल पाठ)
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ जो ध्यावे फल पावे, दुख विनसे मन का। सुख संपति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ मात पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता। मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। अपने हाथ बढ़ाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय जगदीश हरे॥ श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, मन वांछित फल पावे॥ ॐ जय जगदीश हरे॥
📖 अर्थ / भावार्थ
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