भगवान गणेश की आरती
गणेश को समर्पित प्रार्थना जो बाधा विनाशक और ज्ञान के देव को समर्पित है, हर पूजा और अनुष्ठान की शुरुआत में किया जाता है।
सामान्यतः किसी भी समारोह या नए कार्य के आरंभ में विघ्न दूर करने के लिए किया जाता है
हिंदू धर्म में सर्वाधिक प्रचलित आरतियों में से एक। गणेश जी को विघ्नहर्ता और नए कार्यों के स्वामी के रूप में पूजा जाता है।
महत्व एवं विशेषता
गणेश आरती हिंदू पूजा में सर्वोपरि महत्व रखती है। भगवान गणेश, जिन्हें विघ्नहर्ता (बाधाओं को दूर करने वाले) के रूप में जाना जाता है, हिंदू परंपरा में किसी भी पवित्र अनुष्ठान, समारोह या नए प्रयास से पहले सबसे पहले पूजे जाने वाले देवता हैं। 'जय गणेश जय गणेश देवा' शब्दों से शुरू होने वाली यह आरती भारत और विश्वभर के हिंदू समुदाय में सबसे व्यापक रूप से पहचानी जाने वाली भक्ति स्तुतियों में से एक है।
गणेश आरती करने की परंपरा सदियों पुरानी है और पौराणिक कथा पर आधारित है जिसमें भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शिव ने सामूहिक रूप से गणेश को सभी देवताओं में सबसे पहले पूजे जाने का सम्मान दिया। इसीलिए प्रत्येक हिंदू पूजा, विवाह, गृहप्रवेश या व्यापार का शुभारंभ गणेश की प्रार्थना से होता है।
यह आरती गणेश के दिव्य गुणों का वर्णन करती है — उनका एक दंत त्याग और एकाग्रता का प्रतीक है, चार भुजाएं सूक्ष्म शरीर के चार पहलुओं (मन, बुद्धि, अहंकार और चेतना) का प्रतिनिधित्व करती हैं, माथे पर सिंदूर शुभता का संकेत है, और उनका वाहन मूषक नियंत्रित इच्छाओं का प्रतीक है। प्रत्येक छंद केवल स्तुति नहीं बल्कि देवता के स्वरूप के गहरे दार्शनिक महत्व पर ध्यान है।
इस आरती का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से विचारों में स्पष्टता, आध्यात्मिक और सांसारिक मार्ग से बाधाओं का निवारण, तथा घर में समृद्धि और ज्ञान का आगमन होता है। यह गणेश चतुर्थी के दौरान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जब लाखों भक्त घरों, मंदिरों और सार्वजनिक पंडालों में इस आरती का गायन करते हैं।
Hindi Lyrics (मूल पाठ)
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा। एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी, माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी। जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा। पान चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा, लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा। जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा। अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया, बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया। जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा। 'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा, माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा। जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा। दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी, कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी। जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा। भगवान गणेश की जय, पार्वती के लल्ला की जय, ओम गं गणपतये नमः गणेशजी की आरती के बाद करें गणेश वंदना वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि, मंगलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ। गजाननं भूत गणादि सेवितं, कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम् । उमासुतं शोक विनाशकारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम् ।
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