स्तोत्र सूची

🕉️ पतञ्जल योगसूत्र

महर्षि पतञ्जलि रचित | योग दर्शन का मूलग्रन्थ | 196 सूत्र, 4 पाद

योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः
Yogaś-citta-vṛtti-nirodhaḥ  —  Yoga Sutra 1.2
"योग चित्त की वृत्तियों का निरोध है।"

योगसूत्र महर्षि पतञ्जलि द्वारा रचित योग दर्शन का मूलाधार ग्रन्थ है। इसमें 4 पाद (अध्याय) और 196 सूत्र हैं जो मन की प्रकृति, आत्मा की मुक्ति का मार्ग और अष्टांग योग की विस्तृत व्याख्या करते हैं। यह ग्रन्थ हठयोग से बहुत भिन्न है — इसका मुख्य विषय राज-योग अर्थात् मानस की साधना है।

चार पाद (अध्याय)

समाधि पाद51 सूत्र

योग की प्रकृति, मन और समाधि के मार्ग पर। योग को चित्त-वृत्ति-निरोध के रूप में परिभाषित करता है।

साधन पाद55 सूत्र

साधना पर। क्रिया-योग और अष्टांग योग प्रणाली का विस्तृत वर्णन।

विभूति पाद56 सूत्र

दिव्य शक्तियों (सिद्धियों) पर। धारणा, ध्यान, समाधि — अन्तरंग त्रय — और उनसे प्राप्त विभूतियों का वर्णन।

कैवल्य पाद34 सूत्र

कैवल्य (मुक्ति) पर। पुरुष (आत्मा) का सम्पूर्ण स्वातन्त्र्य — गुणों का प्रकृति में प्रत्यावर्तन।

8 मुख्य योगसूत्र

सूत्र 1.1 — समाधि पाद
अथ योगानुशासनम्
Atha Yogānuśāsanam
हिंदी अर्थ: अब योग का अनुशासन प्रारम्भ होता है।
English: Now begins the authoritative instruction on Yoga.
सूत्र 1.2 — समाधि पाद
योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः
Yogaś-citta-vṛtti-nirodhaḥ
हिंदी अर्थ: योग चित्त की वृत्तियों का निरोध है।
English: Yoga is the cessation of the fluctuations of the mind.
सूत्र 1.3 — समाधि पाद
तदा द्रष्टुः स्वरूपेऽवस्थानम्
Tadā Draṣṭuḥ Svarūpe'vasthānam
हिंदी अर्थ: तब द्रष्टा (आत्मा) अपने वास्तविक स्वरूप में स्थित हो जाती है।
English: Then the Seer (pure consciousness) abides in its own essential nature.
सूत्र 2.1 — साधन पाद
तपःस्वाध्यायेश्वरप्रणिधानानि क्रियायोगः
Tapaḥ-svādhyāy-eśvara-praṇidhānāni Kriyā-yogaḥ
हिंदी अर्थ: तपस्, स्वाध्याय और ईश्वर-प्रणिधान — ये तीन क्रिया-योग हैं।
English: Tapas (austerity), Svadhyaya (self-study), and Ishvara Pranidhana (surrender to God) constitute Kriya Yoga.
सूत्र 2.29 — साधन पाद
यमनियमासनप्राणायामप्रत्याहारधारणाध्यानसमाधयोऽष्टावङ्गानि
Yama-niyama-āsana-prāṇāyāma-pratyāhāra-dhāraṇā-dhyāna-samādhayo'ṣṭāv-aṅgāni
हिंदी अर्थ: यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि — ये योग के आठ अंग हैं।
English: The eight limbs of yoga are: Yama (ethical restraints), Niyama (personal observances), Asana (posture), Pranayama (breath control), Pratyahara (withdrawal of senses), Dharana (concentration), Dhyana (meditation), and Samadhi (absorption).
सूत्र 3.1 — विभूति पाद
देशबन्धश्चित्तस्य धारणा
Deśa-bandhaś-cittasya Dhāraṇā
हिंदी अर्थ: किसी एक स्थान पर चित्त को बाँधना (एकाग्र करना) धारणा है।
English: Dharana (concentration) is the binding of the mind to a specific place or object.
सूत्र 3.2 — विभूति पाद
तत्र प्रत्ययैकतानता ध्यानम्
Tatra Pratyayaikatānatā Dhyānam
हिंदी अर्थ: उस स्थान पर चित्त का निरन्तर अखण्ड प्रवाह ध्यान है।
English: Dhyana (meditation) is the uninterrupted flow of awareness toward the same object of concentration.
सूत्र 4.34 — कैवल्य पाद
पुरुषार्थशून्यानां गुणानां प्रतिप्रसवः कैवल्यम्
Puruṣārtha-śūnyānāṁ guṇānāṁ pratiprasavaḥ Kaivalyam
हिंदी अर्थ: जब गुण पुरुष के किसी प्रयोजन से रहित हो जाते हैं तब उनका अपने मूल प्रकृति में प्रत्यावर्तन हो जाता है — यही कैवल्य (मुक्ति) है।
English: Kaivalya (liberation) is the reabsorption of the gunas into their source when they are no longer needed by the Purusha — pure consciousness stands alone in its own glory.

अष्टांग योग — आठ अंग

1
यम
नैतिक नियम — अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह
2
नियम
व्यक्तिगत अनुशासन — शौच, संतोष, तपस्, स्वाध्याय, ईश्वर-प्रणिधान
3
आसन
ध्यान के लिए स्थिर और सुखद आसन
4
प्राणायाम
प्राण-वायु का नियमन और विस्तार
5
प्रत्याहार
इंद्रियों का बाह्य विषयों से निवृत्त होना
6
धारणा
धारणा — चित्त को एक स्थान पर बाँधना
7
ध्यान
ध्यान — अखण्ड एकाग्र चिन्तन
8
समाधि
समाधि — ध्याता, ध्यान और ध्येय का एकत्व

योगसूत्र का महत्त्व

  • योगसूत्र राज-योग का सर्वोच्च प्रमाण ग्रन्थ है — मन की वृत्तियों को समझने की कुंजी।
  • 196 सूत्रों में पूरे मनोविज्ञान की व्याख्या है — आधुनिक मनोचिकित्सा से सहस्रों वर्ष पूर्व।
  • अष्टांग योग का वैज्ञानिक मार्ग — आसन केवल तीसरा अंग है; असली यात्रा यम से समाधि तक है।
  • कैवल्य — पुरुष का सम्पूर्ण स्वातन्त्र्य — भारतीय दर्शन का सर्वोच्च लक्ष्य।

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