ऋग्वेद • धन स्तोत्र
श्री सूक्तम् — 16 मंत्रों का महत्व
श्री सूक्तम् ऋग्वेद के परिशिष्ट में मिलने वाला वह स्तोत्र है जो माँ श्री (लक्ष्मी) को समर्पित है। इसके 16 मंत्र एक पूर्ण "धन-कवच" हैं — धन आकर्षित करने, उसे बनाए रखने और उसे आध्यात्मिक उद्देश्य के लिए उपयोग करने का विधान।
16 मंत्रों की संरचना
आह्वान
माँ श्री का आवाहन — प्रकाश, सोने और कमल के साथ
गुण वर्णन
माँ की श्वेत वर्ण, गजराज सेवित और नित्य समृद्ध स्वरूप
वरदान
धन, पशु, संतान और स्वास्थ्य का आशीर्वाद
स्थायित्व
लक्ष्मी को स्थायी करने की प्रार्थना — "न त्वजामि कदाचन"
पूजा सामग्री
☑ Somvar Puja Checklist
0/7- कमल के फूल — 16 (प्रत्येक मंत्र के लिए एक)
- शुद्ध घी — हवन या दीपक के लिए
- लाल वस्त्र — माँ लक्ष्मी की छवि के लिए
- सोने का सिक्का या आभूषण — पूजा स्थान पर
- गोबर का लेप — पूजास्थान की शुद्धि के लिए
- पंचामृत — अभिषेक के लिए
- चावल की खीर — नैवेद्य
पूजा विधि
स्थान शुद्धि
गोबर या गंगाजल से पूजास्थान शुद्ध करें। उत्तर या ईशान दिशा में माँ की स्थापना करें।
संकल्प
"श्री सूक्तम् पाठ से माँ लक्ष्मी की प्रसन्नता और धन-समृद्धि के लिए" — संकल्प लें।
पुष्पांजलि विधि
प्रत्येक मंत्र के साथ एक कमल अर्पित करें। 16 मंत्र = 16 फूल।
घृत दीप
पाँच बत्तियों वाला घी का दीपक जलाएं — पाठ के दौरान बुझने न दें।
समर्पण
पाठ पूरा होने पर "इदं न मम" बोलकर फल-नैवेद्य माँ को समर्पित करें।
श्रेष्ठ मुहूर्त
शुक्रवार प्रातः 6-8 AM
शुक्र उदय काल
शुक्रवार अभिजित 12-1 PM
सर्वसिद्धिदायक
वरलक्ष्मी व्रत (28 अगस्त 2026)
वर्ष का सर्वश्रेष्ठ दिन
अष्टमी-पूर्णिमा शुक्रवार
लक्ष्मी-शक्ति तिथि