🕉️ निर्वाण षट्कम् (आत्मषट्कम्)
रचयिता: आदि शंकराचार्य | अद्वैत वेदांत
निर्वाण षट्कम् (या आत्मषट्कम्) आदि शंकराचार्य की एक अनुपम रचना है जो अद्वैत वेदांत का सार प्रस्तुत करती है। प्रत्येक श्लोक "मैं क्या नहीं हूँ" की नकारात्मक पद्धति से आत्मा के वास्तविक स्वरूप — शुद्ध चिदानन्द शिव — को उद्घाटित करता है।
📚 अद्वैत वेदांत का सार
शंकराचार्य की यह रचना "नेति नेति" (यह नहीं, यह नहीं) की पद्धति से आत्मा को परिभाषित करती है। जो कुछ भी परिवर्तनशील है — शरीर, मन, बुद्धि, भावना — वह आत्मा नहीं है। आत्मा शाश्वत, निर्गुण और शिव के समान चिदानन्द है।
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