🕯️ शनिवार पीपल दीपक — 10 नियम

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1

केवल सूर्यास्त के बाद

पीपल दीपक सूर्यास्त से 30 मिनट बाद ही जलाएं। दिन में जलाना पितृ तर्पण नहीं, सूर्य पूजा हो जाती है।

2

सरसों तेल — कोई विकल्प नहीं

घी या अन्य तेल मत डालें। सरसों ही शनि का प्रिय तेल है। इसका कोई विकल्प नहीं।

3

पश्चिम दिशा में रखें

दीपक का मुख पश्चिम दिशा में — शनि की दिशा। पूर्व या उत्तर गलत है।

4

🚫 नंगे पैर नहीं

पीपल के नीचे नंगे पैर मत जाएं — विशेषकर शाम को। जूते उतारें लेकिन मोज़े पहन सकते हैं।

5

🚫 तुलसी पत्ता मत चढ़ाएं

तुलसी = विष्णु की पत्नी। पीपल = शनि/पितृ। इन दोनों का मिश्रण वर्जित है।

6

मोटी बाती नहीं

कपास की पतली 7-तार बाती — लंबे समय तक जलती है। मोटी बाती धूम देती है जो शुभ नहीं।

7

पेड़ की जड़ में पहले जल

दीपक से पहले पीपल जड़ में जल + काले तिल चढ़ाएं। "ॐ पितृ देवाय नमः" 3 बार।

8

🚫 दीपक बुझाएं नहीं

दीपक स्वयं बुझने दें। बीच में फूँक मारना या बुझाना — इसे अपशकुन माना जाता है।

9

🚫 मासिक धर्म में न जाएं

महिलाएं मासिक धर्म में पीपल वृक्ष के पास न जाएं — परंपरागत नियम।

10

लोहे के पात्र में तेल

मिट्टी के दीये का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन लोहे की कटोरी शनि की धातु होने से अधिक प्रभावी।

पीपल दीपक सामग्री

0/6
  • सरसों तेल
    Mustard oil — forbidden to substitute
  • लोहे की कटोरी
    Iron bowl — not clay/brass
  • काले तिल
    Black sesame — for offering
  • कपास की बाती (7 तार)
    Cotton wick — 7-strand, not thick
  • जल कलश
    Water pot — for peepal root offering
  • काला कपड़ा (1 टुकड़ा)
    Small black cloth — for Shani

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