🪐 शनि देव जन्म कथा — भविष्य पुराण

सूर्य और छाया के पुत्र — कर्म और न्याय के देवता का प्राकट्य

शनि ध्यान श्लोक

नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥

📖 जन्म कथा

सूर्यदेव की पत्नी संज्ञा उनके तेज को सहन नहीं कर सकीं। उन्होंने अपनी छाया (प्रतिकृति) को पति सेवा में छोड़कर वन में तपस्या करने चली गईं।

छाया और सूर्य के संयोग से तीन पुत्र हुए — शनिदेव, यमराज और तपती नदी। जब शनि माँ के गर्भ में थे, तब छाया भगवान शिव की तपस्या में इतनी लीन थीं कि उन्हें भोजन की भी सुध नहीं रही।

इस तप के प्रभाव से शनिदेव जन्म से ही श्यामवर्णी (नीले-काले) और शिव-भक्त हुए। एक बार बालक शनि ने सूर्यदेव को ही अपनी दृष्टि से तिरछा देखा — और सूर्य का रथ काँप उठा। तभी से शनि की दृष्टि का भय जगत में फैला।

शनिदेव को एक बार हनुमान जी ने लंका में बंधन से मुक्त किया था, इसलिए वे हनुमान भक्तों पर अपनी दृष्टि हल्की करते हैं।

🔢 शनि के 7 नाम और उनकी शक्ति

#नामअर्थशक्ति
1शनि (Shani)धीमी गति से चलने वाले — 29.5 वर्ष में एक राशिकर्म-न्याय
2शनैश्चर (Shanaiśchara)धीरे-धीरे चलने वाला ताराधैर्य और अनुशासन
3मन्द (Manda)मंद गति — विलंब के देवतापरीक्षा और वृद्धि
4पंगु (Pangu)लंगड़े — जन्म में अपाहिज हुएसहनशीलता
5असित (Asita)श्यामवर्णी — नीले-काले रंग केसत्य और न्याय
6काक (Kaka)कौवे के स्वामी — पितृदूतपूर्वज संचार
7सप्तार्चि (Saptarchi)सात किरणों वाले — सप्त ऋषि मित्रज्ञान और विवेक

🌑 2026 शनि जयंती क्यों दुर्लभ है?

16 मई 2026 एक ऐसा दिन है जब शनि जयंती + वट सावित्री व्रत + शनिश्चरी अमावस्या — तीनों एक ही शनिवार को पड़ रहे हैं। यह संयोग दशकों में एक बार होता है।

📋 शनि जयंती व्रत के 7 नियम

1

ब्रह्म मुहूर्त (4–6 AM) में काले तिल मिले जल से स्नान।

2

निर्जला या फलाहार व्रत — अनाज वर्जित।

3

काले या नीले वस्त्र पहनें।

4

सूर्यास्त के बाद भोजन — केवल उड़द दाल, खिचड़ी या तिल-चावल।

5

पूरा दिन लोहे की वस्तु न खरीदें — दान करना ठीक है।

6

सरसों तेल का दीपक संध्या को पीपल वृक्ष के नीचे जलाएं।

7

शनि स्तोत्र / शनि चालीसा का कम से कम 1 पाठ।

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