महाविद्या जयंती • 24 अप्रैल 2026
बगलामुखी जयंती 2026
माँ बगलामुखी — 10 महाविद्याओं में से 8वीं — शत्रुओं को स्तंभित (paralise) करने की शक्ति रखती हैं। 24 अप्रैल 2026 उनकी जयंती है जो गुरु पुष्य नक्षत्र और मासिक दुर्गाष्टमी के साथ पड़ रही है — यह अद्भुत संयोग है।
दुर्गाष्टमी संयोग
24 अप्रैल 2026 को मासिक दुर्गाष्टमी भी है — इसलिए कन्या पूजा और दुर्गा चालीसा का पाठ भी करें। बगलामुखी और दुर्गा दोनों की एक साथ पूजा दोगुना फल देती है।
पूजा सामग्री
☑ Somvar Puja Checklist
0/8- हल्दी माला — 108 मनकों की (पीली)
- पीला वस्त्र — पूजा वेदी के लिए
- हल्दी (कच्ची और पाउडर दोनों)
- पीले फूल — गेंदा या सूरजमुखी
- घी का दीपक — नीम की लकड़ी के साथ
- पीली मिठाई — बेसन के लड्डू या हलवा
- नीम की पत्तियाँ — शत्रु नाश के लिए
- पंचामृत — दूध, दही, घी, शहद, शक्कर
जयंती पूजा विधि
प्रातः स्नान
प्रातः 5-6 बजेसूर्योदय से पहले स्नान करें। पीले वस्त्र पहनें।
वेदी स्थापना
प्रातः 6 बजेपीले वस्त्र पर माँ बगलामुखी की छवि या यंत्र स्थापित करें। हल्दी से स्वस्तिक बनाएं।
पंचामृत अभिषेक
प्रातः 6:30माँ की छवि पर पंचामृत से अभिषेक करें। "ॐ ह्लीं बगलामुखी" बोलते हुए।
हल्दी चढ़ावा
प्रातः 7 बजेहल्दी माला और पीले फूल अर्पित करें। हल्दी से माँ का श्रृंगार करें।
मंत्र जाप
7-8 बजे"ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा" — 108 बार।
नीवेद्य
प्रातः 8 बजेपीली मिठाई (बेसन का हलवा / लड्डू) अर्पित करें। दुर्गाष्टमी के कारण कन्याओं को भी भोग दें।
आरती
समापनमाँ बगलामुखी की आरती करें। नीम की पत्तियाँ जलाएं।
बगलामुखी मूल मंत्र
ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां
वाचं मुखं पदं स्तम्भय
जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय
ह्लीं ॐ स्वाहा
108 बार जाप — हल्दी माला पर