चंद्र देव / सोम देव
जय चंद्र देव
चंद्र देव की आरती जो सोमवार के स्वामी और मन के अधिपति हैं, करवा चौथ, शरद पूर्णिमा और सोमवार व्रत में विशेष रूप से पूजित हैं।
इस आरती के बारे में
चंद्र देव की आरती सोमवार के स्वामी और मन के देवता को समर्पित है जो करवाचौथ, शरद पूर्णिमा और सोमवार व्रत के अवसर पर विशेष रूप से गाई जाती है।
पाठ का समय
करवा चौथ (चंद्रोदय), शरद पूर्णिमा, सोमवार का व्रत, पूर्णिमा, पूर्ण चंद्रमा के दिन
Hindi Lyrics (मूल पाठ)
जय चंद्र देव, ओम जय चंद्र देव। रात्रि के देवता, शीतल आलोक देव॥ जय चंद्र देव॥ सोमवार के स्वामी, मन के अधिपति। चंद्रमा नमस्ते, शिव के मस्तक पति॥ जय चंद्र देव॥ करवाचौथ पर तुम्हारी, पूजा करें नारी। पति की रक्षा के लिए, व्रत करें सारी॥ जय चंद्र देव॥ शरद पूर्णिमा को, शीतल चाँदनी बरसे। चंद्र की किरणों से, अमृत धरती पर बरसे॥ जय चंद्र देव॥ सोम-चंद्र-रोहिणी, तारागण के स्वामी। ज्योतिष में चंद्र ग्रह, मन और माँ के नामी॥ जय चंद्र देव॥
📖 अर्थ / भावार्थ
रात्रि के देवता — चंद्रमा रात्रि के स्वामी और प्रकाश के देवता हैं।
शिव के मस्तक पति — शिव की जटाओं पर चंद्रमा विराजमान हैं।
करवाचौथ — सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं।
शरद पूर्णिमा — इस दिन चंद्रमा से अमृत बरसता है और खीर रखने की परंपरा है।