🛢️ शनि देव को सरसों तेल — महत्व, कारण और सही विधि

शनि शांति का सबसे पुराना और सिद्ध उपाय

सरसों तेल अर्पण का रहस्य

सरसों तेल ही क्यों?

शनि ग्रह काले रंग और पश्चिम दिशा से जुड़े हैं। सरसों का तेल गहरा, तीव्र और गर्म होता है जो शनि की प्रकृति से मेल खाता है। पौराणिक मान्यता है कि तेल से शनि की "ताप (heat)" शांत होती है।

लोहे का पात्र क्यों?

शनि का धातु लोहा है। लोहे के पात्र में तेल रखने से शनि की ऊर्जा और अर्पण शक्ति दोनों बढ़ती हैं।

पश्चिम दिशा क्यों?

शनि की दिशा पश्चिम है। पश्चिम की ओर मुख करके या पश्चिम दिशा में दीपक जलाने से शनि देव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

पूजा सामग्री

शनि तेल अर्पण सामग्री

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  • सरसों का तेल
    100–200 ml, कच्चा
  • लोहे का पात्र / दीपक
    मिट्टी के पात्र से श्रेष्ठ
  • काली बाती
    काले धागे की बाती
  • काले तिल
    जल में मिलाकर अर्पण
  • उड़द
    दान के लिए पास रखें
  • नीला/काला वस्त्र
    आसन के लिए

तेल अर्पण की सम्पूर्ण विधि

1

स्नान और संकल्प

शनिवार को सूर्योदय से पूर्व स्नान करें। काले या नीले वस्त्र पहनें। मन में शनि देव का स्मरण करें।

2

शनि मंदिर या घर में स्थान

शनि की मूर्ति या चित्र के सामने पश्चिम दिशा में बैठें। लोहे का दीपक सामने रखें।

3

तेल और काली बाती

लोहे के पात्र में सरसों का तेल डालें। काले धागे की बाती लगाएं। दीपक प्रज्वलित करें।

4

तेल अर्पण

शनि देव की मूर्ति पर धीरे-धीरे सरसों तेल चढ़ाएं। मंत्र: "ॐ शं शनैश्चराय नमः" — बोलते हुए तेल अर्पित करें।

5

काले तिल जल अर्पण

लोटे में जल लें, उसमें काले तिल मिलाएं और शनि देव को अर्पित करें। यह तेल अर्पण जितना ही शक्तिशाली माना जाता है।

6

दान और परिक्रमा

पूजा के बाद उड़द, सरसों तेल किसी जरूरतमंद को दान करें। शनि मंदिर में 7 परिक्रमा करें।

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