🛢️ शनि तैलाभिषेकम् — तेल अभिषेक का विज्ञान

8 अभिषेक द्रव्य, उनका दिन, लाभ और राशि — शनि पूजा की पूर्ण गाइड।

🔬 8 अभिषेक द्रव्य — दिन, लाभ और राशि

द्रव्यदिनलाभराशि
सरसों तेलशनिवारसाढ़े साती राहत, करियरमकर, कुंभ, मेष
तिल तेलशनिवार/बुधवाररोग मुक्ति, दीर्घायुवृश्चिक, कन्या
गाय का दूधसोमवार/शनिवारशांति, भय मुक्तिकर्क, मीन, धनु
घीशनिवारपितृ शांति, ज्ञानसिंह, धनु, मेष
मधु (शहद)शनिवार सुबहवाणी, मधुर सम्बन्धवृषभ, तुला, मिथुन
दहीशनिवारस्वास्थ्य, पारिवारिक शांतिवृषभ, कर्क
गन्ना रसशनिवार/रविवारधन वृद्धि, यशवृषभ, सिंह
जलप्रतिदिनसफलता, सौभाग्यसभी राशियाँ

📋 5-चरण तैलाभिषेकम् विधि

1

शुद्धि और संकल्प

काले तिल मिले जल से स्नान करें। "ॐ शं शनैश्चराय नमः" 11 बार जपते हुए संकल्प लें।

2

पंचामृत तैयारी

दूध + दही + घी + शहद + गन्ना रस — पाँचों को मिलाकर पंचामृत बनाएं। यह पहले चढ़ाया जाता है।

3

पंचामृत अभिषेक

शनि शिला / मूर्ति पर पंचामृत धीरे-धीरे चढ़ाएं। "ॐ शं शनैश्चराय नमः" 108 बार।

4

सरसों तेल धारा

अब सरसों का तेल पतली धारा में चढ़ाएं — यही "तैलाभिषेकम्" है। मन में कर्म मुक्ति की प्रार्थना करें।

5

शुद्ध जल और आरती

अंत में स्वच्छ जल से शनि देव को स्नान कराएं। काला कपड़ा, तिल, लोहा अर्पित करें। शनि आरती।

🚫 4 वर्जित कार्य

सरसों तेल को रविवार या मंगलवार को शनि अभिषेक में न चढ़ाएं — उल्टा फल।

अभिषेक के बाद तेल घर लेकर न जाएं — मंदिर में ही छोड़ें।

टूटे हुए दीपक में तेल न डालें — अपशकुन।

महिलाएं रजःस्वला अवस्था में शनि मूर्ति का स्पर्श न करें।

तैलाभिषेकम् सामग्री सूची

0/6
  • सरसों का तेल
    250 मिली
  • काले तिल
    100 ग्राम
  • पंचामृत सामग्री
    दूध, दही, घी, शहद, गन्ना रस
  • काला कपड़ा
    1 टुकड़ा — दान
  • लोहे की वस्तु
    पुरानी — अर्पण
  • मिट्टी का दीपक
    अखंड

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