अनुष्ठान

🌙 अधिक मास 2026 — पुरुषोत्तम मास सम्पूर्ण गाइड

त्वरित तथ्य

  • अधिक मास 2026: अधिक जेष्ठ — 14 जून – 13 जुलाई 2026
  • आवृत्ति: लगभग हर 3 वर्ष में एक बार (चंद्र-सौर कैलेंडर संतुलन)
  • देवता: भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) — इस मास के स्वामी
  • पद्मिनी एकादशी: 20 जून | परमा एकादशी: 4 जुलाई
  • वर्जित: विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, नया व्यापार

📖 अधिक मास क्यों आता है?

भारतीय पंचांग चंद्र-सौर (Luni-Solar) पद्धति पर आधारित है। एक चंद्र वर्ष लगभग 354 दिन और एक सौर वर्ष 365 दिन का होता है। इस 11 दिन के अंतर को प्रत्येक 2-3 वर्ष में एक अतिरिक्त मास जोड़कर समायोजित किया जाता है — इसी को अधिक मास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहते हैं।

पद्म पुराण के अनुसार, यह मास किसी देवता का न होने पर स्वयं भगवान श्री हरि विष्णु ने इसे अपना लिया और इसे "पुरुषोत्तम मास" नाम दिया। इसीलिए इस माह में भगवान विष्णु की विशेष आराधना की जाती है।

🗓️ अधिक मास 2026 की एकादशियां

पद्मिनी एकादशी20 जून 2026 (शनि)
परमा एकादशी4 जुलाई 2026 (शनि)

इन दोनों एकादशियों का महत्व सामान्य एकादशियों से सहस्र गुना अधिक है।

✅❌ क्या करें — क्या न करें

करें

  • भगवान विष्णु के सहस्रनाम और भागवत कथा का पाठ करें
  • दीपदान — तुलसी के पास घी का दीप जलाएं
  • अन्न, वस्त्र और धन का दान करें — फल हजार गुना मिलता है
  • तुलसी दल से भगवान विष्णु की पूजा करें
  • व्रत और उपवास — विशेषतः एकादशी को
  • पुराण श्रवण और सत्संग में भाग लें

न करें

  • विवाह संस्कार — पूर्णतः वर्जित
  • मुंडन, जनेऊ, नामकरण संस्कार
  • गृह प्रवेश और नई संपत्ति खरीदना
  • नए व्यापार का शुभारंभ
  • देवताओं की मूर्ति प्रतिष्ठा (देव प्राण प्रतिष्ठा)
अधिक मास 2026 — पुरुषोत्तम मास कब है, क्या करें और क्या न करें | वेदकोश | VedKosh