🕉️ शनि बीज मंत्र — 108 बार जप विधि

ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः॥

📖 मंत्र का अर्थ

बीज अक्षरअर्थ
ॐ / Omब्रह्मांड की आदि ध्वनि
प्रां (Pram)शनि की पृथ्वी-शक्ति का बीज
प्रीं (Prim)शनि की जल-शक्ति का बीज
प्रौं (Praum)शनि की अग्नि-शक्ति का बीज
सः (Sah)सत्य की स्थापना
शनैश्चराय नमःशनि देव को प्रणाम

📿 108 बार जप करने की विधि

108 दाने की काली तिल माला या लोहे की माला लें। हर दाने पर एक बार "ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः" का जप करें। पूरी माला = 108 बार। 3 माला = 324 बार (विशेष साधना)। शनि जयंती और शनिश्चरी अमावस्या पर 7 माला = 756 बार (महाजप)।

शनिवार प्रातः 5–7 बजे
🧘काली ऊनी आसन पर बैठें
📿लोहे या काले तिल की माला प्रयोग करें
🧭मुख पूर्व या उत्तर दिशा में रखें
👕नीले या काले वस्त्र पहनें
🪐सामने शनि यंत्र या मूर्ति रखें

📜 सम्पूर्ण शनि मंत्र संग्रह

शनि बीज मंत्र:
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः॥

शनि गायत्री मंत्र:
ॐ काकध्वजाय विद्महे खड्गहस्ताय धीमहि।
तन्नो मन्दः प्रचोदयात्॥

शनि मूल मंत्र:
नीलांजनसमाभासं रवि-पुत्रं यमाग्रजम्।
छाया-मार्तण्ड-सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥

✨ जप के लाभ — क्षेत्रवार

क्षेत्रलाभ
करियरनौकरी में रुकावटें दूर होती हैं, पदोन्नति मिलती है
स्वास्थ्यपुरानी बीमारियां ठीक होती हैं, हड्डियां मजबूत बनती हैं
कानूनीकोर्ट-कचहरी के मामले अनुकूल होते हैं
साढ़े सातीसाढ़े साती और ढैय्या का कष्ट कम होता है
अनुशासनमन में स्थिरता, आलस्य दूर होता है
पितृ दोषपितृ दोष शांत होता है

🔗 संबंधित पृष्ठ

शनि 108 नामशनि चालीसासाढ़े साती उपायहनुमान बाहुक
शनि बीज मंत्र 108 बार — पूर्ण पाठ, अर्थ और विधि | वेदकोश | VedKosh