वरलक्ष्मी व्रत • 28 अगस्त 2026

वरलक्ष्मी व्रत 2026 — पूजा विधि

वरलक्ष्मी व्रत श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से पहले आने वाले शुक्रवार को मनाया जाता है। 2026 में यह 28 अगस्त (शुक्रवार) को है। दक्षिण भारत और महाराष्ट्र में यह माँ लक्ष्मी की उपासना का सबसे बड़ा व्रत है।

व्रत तिथि

28 अगस्त 2026 (शुक्रवार)

श्रावण शुक्ल एकादशी

पूजा मुहूर्त

प्रातः 6:00 — 8:30 AM

अभिजित मुहूर्त

उद्यापन

28 अगस्त या पूर्णिमा तक

4 सितंबर 2026

पारणा

29 अगस्त (शनिवार)

सूर्योदय के बाद

पूजा सामग्री

Somvar Puja Checklist

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  • माँ लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र
  • कलश — पीतल या मिट्टी का
  • आम के पत्ते — 5 या 11
  • श्रीफल (नारियल) — कलश के लिए
  • लाल या पीला वस्त्र — वेदी के लिए
  • कमल का फूल — 8 या 16
  • कुमकुम, हल्दी, चावल
  • पंचामृत — दूध, दही, घी, शहद, शक्कर
  • पंचामृत नैवेद्य — खीर, पेड़ा, फल
  • सोने का धागा — कलाई पर बाँधने हेतु

पूजा विधि — 7 चरण

1

प्रातः स्नान

सूर्योदय से पहले स्नान करें। पीले या लाल वस्त्र पहनें।

2

व्रत संकल्प

"मैं माँ वरलक्ष्मी का व्रत रखती हूँ — धन, सौभाग्य और संतान की कामना से।" पूर्व मुख होकर संकल्प लें।

3

कलश स्थापना

कलश में जल भरें। आम के पत्ते लगाएं। नारियल ऊपर रखें। सोने का धागा लपेटें।

4

षोडशोपचार

माँ लक्ष्मी को 16 उपचारों से पूजन करें। प्रत्येक उपचार में "ॐ वरलक्ष्म्यै नमः" बोलें।

5

वरलक्ष्मी मंत्र

"ॐ श्रीं ह्रीं वरलक्ष्म्यै नमः" — 108 बार। इसके बाद श्री सूक्त का पाठ।

6

गोल्डन थ्रेड

पूजा के बाद सोने के धागे (मणि-दोरा) को कलाई पर बाँधें। यह व्रत का सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

7

भोग और आरती

खीर, पेड़ा और फल का भोग लगाएं। महालक्ष्मी आरती करें। प्रसाद वितरित करें।

सजावट के विचार

कलश श्रृंगार

नारियल को साड़ी या ब्लाउज से सजाएं — यह माँ लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है।

रंगोली

प्रवेश द्वार पर कमल, पगचिह्न और लक्ष्मी यंत्र की रंगोली बनाएं।

पुष्प मंडप

पूजा वेदी के ऊपर गेंदा और गुलाब से मंडप सजाएं।

दीपमालिका

वेदी के चारों ओर 16 घी के दीपक लगाएं।

वरलक्ष्मी व्रत 2026 — तिथि, पूजा विधि और सजावट गाइड | वेदकोश | VedKosh